मैथिली शरण गुप्त: हिंदी में जीवन परिचय | साहित्यिक योगदान और रचनाओं का अध्ययन 📚✨

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मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) : Introduction

आज के इस ब्लॉग में हम “मैथिली शरण गुप्त का जीवन परिचय” “Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in hindi” के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं। इसमें हम उनके जीवन की उत्कृष्टता, उनके साहित्यिक योगदान की महत्वपूर्ण बातें, उनके प्रमुख रचनाओं का विवरण, और उनकी शैली के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

_मैथिली शरण गुप्त - Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in hindi
_मैथिली शरण गुप्त – Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in hindi

1. जन्म और परिवार: 🏡👪

  • मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) का जन्म 3 अगस्त, 1886 को बिहार के चिरौरी गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित नीतिकरण था, जो एक सांस्कृतिक प्रेरणास्थान थे।
  • उनका परिवार संपन्न और सांस्कृतिक वातावरण में विशेष रूप से समृद्ध था। मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) की माता का नाम अंजनी देवी था।


    पिछले लेख में, हमने महत्वपूर्ण विषय महादेवी वर्मा का जीवन परिचय (Mahadevi Verma Ka Jivan Parichay in Hindi) और स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) का जीवन परिचय – Biography के बारे में अच्छे से और सम्पूर्ण जानकारी प्रदान कर चुके हैं।

मैथिली शरण गुप्त: जीवन और साहित्य की झलकियाँ (Maithili Sharan Gupt: Glimpses of Life and Literature) | Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in hindi

विवरणजानकारी
पूरा नाममैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt)
जन्म तिथि3 अगस्त, 1886
जन्म स्थानचिरौरी, बिहार
पिता का नामपंडित नीतिकरण
माता का नामअंजनी देवी
शिक्षावाराणसी, कोलकाता
प्रमुख रचनाएँ“भारत-भारती”, “युगवाणी”, “आर्यधर्म”
प्रमुख नाटक“शकुन्तला”, “सखी”, “सभा पारिजात”
मृत्यु तिथि12 दिसंबर, 1964

2. शिक्षा और साहित्यिक प्रेरणा: Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in hindi

  • उन्होंने वाराणसी और कोलकाता से अपनी शिक्षा पूरी की। वाराणसी में उन्होंने विशेष रूप से सांस्कृतिक अध्ययन किया।
  • मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) की साहित्यिक प्रेरणा और रचनात्मक दृष्टि उनके परिवार के शिक्षाप्रद वातावरण से प्राप्त हुई।

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3. कविता कला की शुरुआत: Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in hindi

  • मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) की कविताओं में उनकी शैली और भावनाएँ संवेदनशीलता से भरी हुई हैं। उनका काव्य उनके अंतर्मन से प्रेरित होता था।
  • उनकी पहली कविता संग्रह “रसायन” का प्रकाशन 1910 में हुआ था, जो काव्य जगत में उनकी पहचान बन गया।

4. कृतियाँ:

  • मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) की रचनाओं में कई महत्वपूर्ण काव्य संग्रह शामिल हैं जैसे कि “यशोधरा”, “सहेली”, “द्वारिका”, “कानन कुंज” और “सागर संग्राम”।
  • उनके नाटक “शकुन्तला”, “सखी” और “सभा पारिजात” भी उनके साहित्यिक योगदान के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

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5. लेखनी और योगदान:

  • मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) ने हिंदी साहित्य में अपने लेखनी के माध्यम से एक अद्वितीय स्थान प्राप्त किया है। उनकी रचनाएँ राष्ट्रीय चेतना, प्रेम, और सामाजिक विचारों को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करती हैं।
  • उनके लेखन की विशालता और गहराई से उन्होंने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दिखाई।

6. साहित्यिक उपलब्धियाँ:

  • मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) की अमूल्य उपलब्धियों में “भारत-भारती”, “युगवाणी”, “आर्यधर्म”, “यशोधरा”, “सहेली”, “कानन कुंज” और “सागर संग्राम” शामिल हैं।
  • उनकी रचनाओं का अनूठा संग्रह हिंदी साहित्य के रूप में माना जाता है और उनका योगदान अद्वितीय है।

मैथिली शरण गुप्त: हिंदी साहित्य के महान कवि का 3 समृद्ध योगदान: Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in hindi

मैथिली शरण गुप्त के निर्माण का एक अद्वितीय संग्रह है, जो हिंदी साहित्य में एक अविस्मरणीय चिन्ह छोड़ गया है। उनकी कविताओं में भावनाओं का गहराई से सामंजस्य, सरलता और साहस है।

कविताएँ (Poetry):

  • “यशोधरा” (Yashodhara): यह कविता एक अद्भुत काव्यकला का प्रतीक है, जो मैथिली शरण गुप्त की साहित्यिक उपलब्धियों में एक उच्च स्थान रखती है। इसमें मानवीय संवेदना, प्रेम, और धार्मिकता के महत्वपूर्ण मुद्दे प्रस्तुत किए गए हैं।
  • “सहेली” (Saheli): यह कविता महिला उत्थान और स्वतंत्रता के महत्व को उजागर करती है। इसमें स्त्रीशक्ति के प्रति उनकी आदर्श भावना को व्यक्त किया गया है।
  • “द्वारिका” (Dwarka): यह कविता धार्मिक भावनाओं और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी प्रेम और समर्पण को दर्शाती है।

नाटक (Plays):

  • “शकुन्तला” (Shakuntala): इस नाटक में भारतीय संस्कृति और धार्मिकता के महत्वपूर्ण विषयों को सुंदरता से व्यक्त किया गया है।
  • “सखी” (Sakhi): यह नाटक मित्रता और सामाजिक न्याय के महत्व को बखूबी उजागर करता है।
  • “सभा पारिजात” (Sabha Parijat): इस नाटक में सामाजिक दुर्गति और समाज में सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाया गया है।

निबंध (Essays):

  • “भारत-भारती” (Bharat-Bharati): इस निबंध में भारतीय संस्कृति, भाषा, और समाज की महत्वपूर्ण विषयों पर विचार किए गए हैं।
  • “युगवाणी” (Yugavani): इस निबंध में समाजिक न्याय और मानवीयता के विषयों पर विचार किए गए हैं।
  • “आर्यधर्म” (Aryadharm): इस निबंध में धर्म, नैतिकता, और राष्ट्रीय उत्थान के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है।

इन सभी रचनाओं ने मैथिली शरण गुप्त के नाम को अमर बनाया है और उनकी विचारधारा, साहित्यिक दक्षता, और समाज सेवा के प्रति उनकी आस्था को प्रकट किया है।

7. नागरिकता और समाज सेवा:

  • मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) ने राष्ट्रीय चेतना के साथ-साथ समाज सेवा में भी अपना योगदान दिया।
  • उनके द्वारा लिखी गई कई लेख और रचनाएँ समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

8. अंतिम दिनों की कहानी:

  • मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) ने 12 दिसंबर, 1964 को अपनी अंतिम साँस ली।
  • उनके चले जाने के बाद भी, उनकी कविताएँ और रचनाएँ हमें सदैव प्रेरित करती रहेंगी।

इस प्रकार, मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt) का जीवन एक उत्कृष्ट कवि, लेखक, और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में हमारे साहित्य और समाज को आदर्शों की दिशा में प्रेरित करता है।


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FAQs: मैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in hindi)

1. मैथिली शरण गुप्त का जन्म कब हुआ था?

  • मैथिली शरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त, 1886 को बिहार के चिरौरी गाँव में हुआ था।

2. मैथिली शरण गुप्त जी की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?

  • मैथिली शरण गुप्त जी की प्रमुख रचनाएँ “भारत-भारती”, “युगवाणी”, “आर्यधर्म”, “यशोधरा”, “सहेली”, “कानन कुंज” और “सागर संग्राम” शामिल हैं।

3. मैथिली शरण गुप्त जी का शिक्षा का क्या ब्यौरा था?

  • उन्होंने वाराणसी और कोलकाता से अपनी शिक्षा पूरी की, जहां उन्होंने विशेष रूप से सांस्कृतिक अध्ययन किया।

4. मैथिली शरण गुप्त जी का योगदान क्या है हिंदी साहित्य के विकास में?

  • मैथिली शरण गुप्त जी ने हिंदी साहित्य में अपने अद्वितीय योगदान के माध्यम से एक अद्वितीय स्थान प्राप्त किया है। उनकी रचनाएँ राष्ट्रीय चेतना, प्रेम, और सामाजिक विचारों को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करती हैं।

5. मैथिली शरण गुप्त जी का निधन कब हुआ?

  • मैथिली शरण गुप्त जी का निधन 12 दिसंबर, 1964 को हुआ था।

Frequently Asked Questions: Biography of Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in English

1. When was Maithili Sharan Gupt Gupt born?

  • Maithili Sharan Gupt Gupt was born on August 3, 1886, in the village of Chirauri, Bihar.

2. What are the notable works of Maithili Sharan Gupt Gupt?

  • Some of the notable works of Maithili Sharan Gupt Gupt include “Bharat-Bharati,” “Yugavani,” “Aryadharm,” “Yashodhara,” “Saheli,” “Kanan Kunj,” and “Sagar Sangram.”

3. What was Maithili Sharan Gupt Gupt’s educational background?

  • He received his education in Varanasi and Kolkata, where he particularly studied cultural subjects.

4. What contribution did Maithili Sharan Gupt Gupt make to the development of Hindi literature?

  • Maithili Sharan Gupt Gupt made a significant contribution to Hindi literature through his unique writings that express national consciousness, love, and social ideals.

5. When did Maithili Sharan Gupt Gupt pass away?

  • Maithili Sharan Gupt Gupt passed away on December 12, 1964.


इस Blog में, हमने आपकोमैथिली शरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt Ka Jeevan Parichay in Hindi) का जीवन परिचय के बारे में पूरी जानकारी दी है। यह ट्यूटोरियल आपके लिए उपयोगी होगा। आपको यह जानकारी कैसी लगी कमेंट कर के जरूर बताइये और अपने सुझाव को हमारे साथ शेयर करें।

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